22 May 2020

लंबे कानूनी विवाद से निकलने के बाद 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती एक बार फिर अदालत की चौखट पर आ खड़ी हुई है, इस बार मामला आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को दस प्रतिशत आरक्षण नहीं देने का है

लंबे कानूनी विवाद से निकलने के बाद 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती एक बार फिर अदालत की चौखट पर आ खड़ी हुई है, इस बार मामला आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग  को दस प्रतिशत आरक्षण नहीं देने का है


इस बार मामला हमेशा कौ तरह भर्ती परीक्षा में पूछे गए सवालों के सही उत्तरों के साथ आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईडब्ल्यूएस ) को दस प्रतिशत आरक्षण नहीं देने का है। दोनों मुद्दों पर अलग-अलग याचिकाएं आ रही हैं। हालांकि सुनवाई तभी होगी जब हाईकोर्ट मामले को अतिआवश्यक मानते हुए 'अर्जेंसी एप्लीकेशन' स्वीकार करेगा।

ईडब्ल्यूएस और सवालों के गलत जवाब को लेकर अधिवक्ता सीमांत सिंहकहते हैं कि प्रदेश सरकार ने 13 अगस्त 2019 को शासनादेश जारी कर ईंडब्ल्यूएस को दस प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया। शिक्षक भर्ती का परिणाम जारी होने के बाद 13 मई 2020 को प्रदेश सरकार ने शासनादेश जारी कर
निदेशक, बेसिक शिक्षा लखनऊ और सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागशज को सभी नियमों और शासनादेशों का पूरी तरह से पालन करते हुए नियुक्ति करने का निर्देश दिया। इसी दिन नियुक्ति प्रक्रिया की गाइडलाइन जारी कर दी गई। इसमें कहा गया कि आरक्षण सरकार के नियमों और शासनादेशों के तहत दिया जाएगा। इसमें एक्स सर्विस मैन, दिव्यांग, सेनानी आश्रित आदि सभी श्रेणियों का तो जिक्र हैं, मगर आर्थिक रूप से पिछड़ों को आरक्षण देने का कहीं पर भी जिक्र नहीं है। जबकि इससेकाफी पहले 13 अगस्त 2019 को ही आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का शासनादेश जारी हो चुका है

लंबे कानूनी विवाद से निकलने के बाद 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती एक बार फिर अदालत की चौखट पर आ खड़ी हुई है, इस बार मामला आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को दस प्रतिशत आरक्षण नहीं देने का है Rating: 4.5 Diposkan Oleh: news