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03 July 2024

मानदेय पर रखे जाएंगे एडेड स्कूलों से निकाले गए 2,214 तदर्थ शिक्षक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बीते साल नवंबर में हटाए गए थे

 मानदेय पर रखे जाएंगे एडेड स्कूलों से निकाले गए 2,214 तदर्थ शिक्षक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बीते साल नवंबर में हटाए गए थे

लखनऊ : अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों से निकाले गए 2,214 तदर्थ शिक्षकों को मानदेय पर रखा जाएगा। मंगलवार को कैबिनेट ने इसे हरी झंडी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने 2,254 तदर्थ शिक्षकों की नौ नवंबर वर्ष 2023 को सेवाएं समाप्त कर दीं थी। ऐसे शिक्षक भी इसमें थे जिन्हें 17 महीने से वेतन नहीं मिला था और उन्हें पूरा लंबित भुगतान कर सेवा समाप्त कर दी गई थी। इनम 40 तदर्थ शिक्षक अब दूसरी जगह समायोजित हो गए हैं। इसलिए बचे हुए 2,214 शिक्षकों को योगी सरकार मानदेय पर रखेगी।


अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा दीपक कुमार ने बताया कि सहायक अध्यापकों को 25 हजार रुपये और प्रवक्ताओं को 30 हजार रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। राज्य सरकार इसके लिए प्रबंधतंत्र को ग्रांट देगी। अगर वह चाहें तो अपने स्तर से प्रति महीने नियत किए गए इस मानदेय को बढ़ा भी सकते हैं। बाकी खर्चा उन्हें अपनी आय से करना होगा। एडेड माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों के अल्पकालिक व मौलिक पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए मानदेय पर अस्थायी नियुक्ति की जाएगी। प्रबंधतंत्र अपनी न्यूनतम आवश्यकता को पूरा करने के लिए मानदेय पर इन शिक्षकों को रखेगा। 




एडेड माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को शिक्षा सेवा चयन आयोग के द्वारा आगे भरा जाएगा। पद खाली होने की स्थिति में यह मानदेय शिक्षक 62 वर्ष की आयु तक अपनी सेवाएं दे सकेंगे। मालूम हो कि वर्ष 1993 के बाद एडेड माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए प्रबंधतंत्र ने अपने स्तर से तदर्थ शिक्षकों की भर्ती की। वर्ष 2000 से लेकर वर्ष 2004 तक नियमों के विपरीत भी तमाम तदर्थ शिक्षक रख लिए गए। ऐसे में मामला कोर्ट तक पहुंचा। फिर नौ नवंबर वर्ष 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने तदर्थवाद को खत्म करने के निर्देश दिए। सुप्रीम कोर्ट ने राजकोष से इनको वेतन न दिए

जाने के भी निर्देश दिए। ऐसे में बीते 20 से 30 वर्ष तक अपनी सेवाएं एडेड माध्यमिक स्कूलों में दे चुके शिक्षक बेरोजगार हो गए। उनके लिए जीवन-यापन करना कठिन हो गया। कई बार शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। आखिरकार मांग पूरी कर ली है

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