एक विश्लेषण: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 2019 में मिशन प्रेरणा लॉन्च किया गया और
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 2019 में मिशन प्रेरणा लॉन्च किया गया और 2023 तक प्राप्ति हेतु कुछ लक्ष्य निर्धारित किये गए... लक्ष्य काफी सोंच समझकर और व्यवहारिक लक्ष्य थे जिनको ससमय प्राप्त किया जा सकता #था..... इसी बीच केंद्र सरकार ने निपुण भारत की शुरुआत कर दी और राज्य सरकार को अपने प्रेरणा लक्ष्य को निपुण भारत के अनुसार बदलना पड़ा... निपुण भारत के लक्ष्य पूरे देश पर लागू हैँ तो केंद्र सरकार ये भूल रही है कि केरल के बच्चे और वहां की आंगनबाडी व्यवस्था, उत्तर प्रदेश की व्यवस्था से कहीं आगे है... ऐसे में निपुण भारत के लक्ष्य उत्तर प्रदेश की भौतिक, शैक्षणिक व्यवस्था को देखते हुए कतई व्यवहारिक नहीं... जिस प्रदेश में आंगनवाड़ी नाम मात्र के दिन खुलते हों वहां के बच्चों के लिए निपुण भारत के लक्ष्य 2026 तो क्या 2046 तक भी पूर्ण करना सम्भव नहीं....
इसी बीच अध्यापको को घेर दिया dbt जैसे कार्य में... ये कार्य ग्राम पंचायत स्तर से भी करवाया जा सकता था... परन्तु शैक्षिक लक्ष्य का निर्धारण करके उसको सफल बनाने वाले अध्यापक को dbt में उलझाना कहाँ तक सही है? शिक्षक से ज़ब तक सिर्फ शिक्षण कार्य न करवाया जाएगा कोई भी लक्ष्य प्राप्त नहीं होगा....
जुलाई अगस्त में अध्यापक ईधर उलझा दिया... उधर ना बच्चों के पास किताबें.. सितम्बर के बाद से अवकाश शुरू हो जाएंगे... फिर winter वेकेशन... फिर परीक्षा... फिर नया सत्र... बच्चे सीखे 🔔
इतनी छोटी सी बात बड़े बड़े अधिकारी क्यों नहीं समझते?

