07 May 2020

69000 SHIKSHAK BHARTI तारीखों में कब क्या हुआ? 15 माह से लटका था भर्ती परीक्षा का परिणाम

69000 SHIKSHAK BHARTI तारीखों में कब क्या हुआ? 15 माह से लटका था भर्ती परीक्षा का परिणाम


बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में कट ऑफ को लेकर उच्च न्यायालय की खंडपीठ का फैसला आने के बाद परीक्षा में शामिल हुए चार लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने राहत महसूस की है। अभ्यर्थियों को बीते 15 महीने से परिणाम जारी होने का इंतजार है, जो जल्द ही पूरा हो जाएगा। सीएम ने किया फेसले का स्वागत सीएम योगी

आदित्यनाथ ने 69000 सहायक अध्यापक भर्ती मामले में उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने सभी सफल अभ्यर्थियों को आने वाले समय में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में योगदान देने के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनका अभिनंदन किया है। सुधरेगा शिक्षक छात्र अनुपात 69,000 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के बाद विद्यालयों में न केवल शिक्षकों की कमी दूर हो जाएगी बल्कि प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा जहां शिक्षक-छात्र अनुपात से अधिक संख्या में शिक्षक उपलब्ध होंगे। प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात 1:30 है जबकि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1:35 है।

69000 भर्ती : तारीखों में कब क्या हुआ?

5 दिसंबर 2018 को बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में प्राथमिक स्तर के विद्यालयों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया। 4,30,479 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया।

6 जनवरी 2019 को 4 लाख 12 से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। 7 जनवरी 2019 को कटऑफ घोषित की। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 65 %, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 60 % कटऑफ तय की गई।


 29 मार्च 2019 को लखनऊ उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने 60 और 65 प्रतिशत कटऑफ को गलत ठहराते हुए 68500 सहायक अध्यापक भर्ती की तर्ज पर एससी, एसटी और ओबीसी के लिए 40% और सामान्य वर्ग के लिए 45% कटऑफ निर्धारित करते हुए परिणाम जारी करने का आदेश दिया। जिसके बाद उच्च न्यायालय की एकल पीठ के निर्णय के खिलाफ बेसिक शिक्षा विभाग ने खंड पीठ में अपील की।


6 मई 2020 को उच्च न्यायालय की खंड पीठ ने विभाग की ओर से निर्धारित कटऑफ को सही ठहराते हुए एकलपीठ का आदेश निरस्त किया।

लिखित परीक्षा के बाद क्वालिफाइंग मार्क्स में कर दिया गया था बदलाव

विस, लखनऊ : शिक्षक भर्ती को लेकर हाईकोर्ट की एकल पीठ में सचिव योग्य शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कटऑफ बढाया है जो कि पूरी तरह बेसिक शिक्षा की ओर से 7 जनवरी विधि अनुकूल है। सरकार ने सात 2019 के शासनादेश के खिलाफ जनवरी के शासनादेश का बचाव दायर याचिका को चुनौती दी गई थी जिसमें 6 जनवरी 2019 को लिखित परीक्षा के बाद सामान्य अभ्यर्थियों के लिए 65 व आरक्षित वर्ग के लिए 60 प्रतिशत कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया करते हुए कहा था कि क्वालिटी एजुकेशन के लिये यह निर्णय लिया गया है। वहीं, एकल पीठ के आदेश का बचाव में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षा मित्रों को आगामी दो परीक्षाओं में 25 मार्क्स का वेटेज था कि लिखित परीक्षा होने के बाद दिये जाने का निर्देश दिया गया था। क्वालिफाइंग मार्क्स घोषित करना, वर्ष 2018 की सहायक शिक्षक भर्ती विधि के सिद्धांतों के विरुद्ध था। परीक्षा में क्वालीफाइंग मार्क्स 45 याचियों ने एकल पीठ के सामने व 40 प्रतिशत तय किया गया था, सरकार पर आरोप लगाया था कि जिसमें वे भाग ले चुके थे। इस बार शिक्षामित्रों को भर्ती से रोकने के लिये, उनके लिये सहायक शिक्षक पद सरकारने पिछली परीक्षा की तुलना में पर भर्ती होने का आखिरी मौका था इस बार अधिक क्वालिफाइंग मार्क्स लिहाजा इसका क्वालीफाइंग मार्क्स घोषित कर दिया था। एकल पीठ के पिछली परीक्षा के अनुसार ही होना फैसले के खिलाफ राज्य सरकार चाहिए। डबल बेंच के अंतरिम आदेश एवं अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से चयन प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी से डबल बेंच के समक्ष तर्क दिया है केवल अंतिम परिणाम घोषित करने गया था कि सरकार ने अच्छे एवं पर ही रोक लगी थी।
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