72825 भर्ती पर हिमांशु राणा की एक और पोस्ट, जरूर पढ़े
72825 -
ये भर्ती 6/7/2015 को अंतिम सुनवाई के पश्चात बंद होने जा रही थी जिसको holistic रूप किसने दिया वो वर्तमान में न्यायालय द्वारा बनाये गए नोडल अधिवक्ता प्रशांत शुक्ला जी से वही लोग पूछें जो उनके इर्द गिर्द मंडरा रहे हैं ।
न WP (c) 167/2015 Himanshu Rana & othrs Vs Union of India & othrs admit होती और न ही भर्ती के व्यापक अवसर मिलते । खैर इसका इतिहास बहुत लंबा है और कई चयनित इससे चिढ़ भी जाते हैं ।
वर्ष 2017 में भर्ती का अंतिम निर्णय आया जिसमे सरकार की अपील allow हुई और 72825 (अखिलेश यादव) वाली की जीत हुई यानी 15th amendment जीता था लेकिन न्यायालय ने 72825 (मायावती) के लगभग 65666 posts भर दिए थे और 12th amendment पर हुई नियुक्ति दया के आधार पर बहाल रखी गई ।
सरकार और शिक्षा मित्रों की अपील को ख़ारिज करके लगभग 1,37,500 नियुक्तियों के अवसर भी मिले और इसके बाद दो भर्ती भी की गई ।
वर्तमान केस एक अनोखा केस है interim order पर contempt और उस पर notice issue होना ठीक उसी प्रकार है कि अपराध साबित हुआ लेकिन अपराधी पूर्व में हुई interim bail को लेकर रिहाई की माँग कर रहा है ।
केस की स्थिति - ये वाद केवल अब mercy पर है और देख रहा हूँ कई लोग इसमें सरकार को चेतवानी दे रहे हैं जबकि हकीकत ये है कि सरकार से विनम्र निवेदन किया जाये अब चुनावी माहौल भी है आपके संसद विधायक और ग्राम प्रधान यही सरकार के लिए सर्वोपरि हैं इसके अलावा महाराज जी से जिसका जैसा भी संपर्क हो करे और उन्हें याद दिलाए कि उनके लिए चुनाव में आप campaign तक किए हैं तो बात बनेगी , अगर आप सोच रहे हैं कि बिना सरकार के हामी भरे आपको कुछ मिलेगा तो ये आपकी भूल है क्योंकि न्यायिक प्रक्रिया लड़ने वाले धुरंधरों से बेहतर कौन जानता है ?
भर्ती को लेकर प्रदेश में अजब गजब ठंडी के मौसम में ही होता है और छुट्टियाँ भी हैं तो मेरे हिसाब से माननीयों से मिलने का जिसको जहाँ जैसा अवसर मिले संपर्क करे ।
मेरिट में केस गया तो कुछ नहीं होगा वैसे वर्तमान बेंच ख़ुद मेरिट में नहीं जा रही है । कल मैंने ख़ुद कई अगुवाकरों से संपर्क किया और उन्हें मेरिट की स्थिति से निपटने के लिए भी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय दिए परंतु देखते हैं क्या होता है ?
देखिए ये मौक़ा मिला है इसको वरदान मानिए और ऐसे काले कोट वाले निट्ठलों से दूर रहिए जो आज भी आपको भ्रमित कर रहे हैं और वसूली चालू है , जो लोग हमसे 2017 में जुड़े थे उनके नाम जहाँ थे हमने ऑनलाइन कर दिए समस्त पीडीएफ whatsapp groups में डाल दी और हमने आपको सीधे वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नम्बर दिए और जुड़वा दिया और इसका पोस्ट और लाइव सबसे पहले मैंने ही किया था फ़ेसबुक पर कि किसी का नुक़सान न हो और ये काले कोट वाले किसी को ठगने न पायें परंतु ये बाज नहीं आ रहे हैं इसलिए इनसे सावधान रहिए ।
कल भी नोडल अधिवक्ता प्रशांत जी से बात हुई है डेटा compile हो रहा है और segregate हो रहा है लेकिन समय लगेगा , उनसे इन सब बातों पर भी चर्चा हुई तो उन्होंने साफ़ कहा कि 16 dec की मध्य रात्रि के बाद किसी का कुछ नहीं होगा । मैं पूछ भी लिया कि लिखित में तो है नहीं ऐसा आदेश में तो कहे कि वो जज हैं भूल जाएँगे क्या और फिर हम लोग भी तो बतायेंगे कि पहले और बाद का कौन है ?
महादेव सभी की रक्षा करें ।

