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14 September 2021

1964 पेंशन नियमावली के दायरे में आने वाले कर्मियों को पेंशन का हक : अधिवक्ता, हाईकोर्ट द्वारा बुद्धि राम केस में दिए गए निर्णय का हवाला

 1964 पेंशन नियमावली के दायरे में आने वाले कर्मियों को पेंशन का हक : अधिवक्ता, हाईकोर्ट द्वारा बुद्धि राम केस में दिए गए निर्णय का हवाला

प्रयागगाज। लाल लाल साहब सिंह मामले में अधिवक्ता ने हाईकोर्ट द्वारा बुद्धि राम केस में दिए निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि इस केस में हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पेंशन योजना का लाभ पाने के हकदार वे सभी लोग हैं जो 1964 की पेंशन नियमावली के दायरे में आते हैं। जबकि सरकारी अधिवक्ता का कहना था कि 22 मई 2006 के शासनादेश के जरिए अंशदान जमा करने हेतु कट ऑफ डेट जारी की गई थी। मगर याची ने नियत तिथि के भीतर अपना अंशदान जमा नहीं किया। याचीगण का कहना था कि 2006 का शासनादेश उनको कभी उपलब्ध ही नहीं कराया गया तथा याचीगण को योजना की जानकारी 2017 में जारी शासनादेश के आधार पर हुईं और तब उन्होंने कट ऑफ डेट के भीतर ही अपना अंशदान जमा करने की पेशकश की थी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। 2006 के शासनादेश द्वारा जो कट ऑफ डेट जारी की गई थी, उसे हाईकोर्ट ने बुद्धि राम केस में रदुद कर दिया था तथा 2017 का शासनादेश हाईकोर्ट द्वारा बुद्धि राम केस में दिए निर्णय के अनुपालन में जारी किया गया है। कोर्ट ने कहा कि यह शासनादेश सिर्फ उच्च प्राथमिक विद्यालयों तक सीमित नहीं रह सकता है, बल्कि इसका विस्तार उन सभी शिक्षण संस्थाओं तक होगा जो 4964 की पेंशन नियमावली के दायरे में आते हैं।
 


सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह शासनादेश का लाभ ऐसे सभी शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों को समान रूप से देगी। कोर्ट ने याचीगण को पेंशन भुगतान न करने का 2 अगस्त 2017 का आदेश रदुद कर दिया है तथा 2 माह के भीतर याचीगण को ब्याज सहित अंशदान जमा करवा कर पेंशन भुगतान का आदेश दिया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने 1964 से शासकीय सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों के अध्यापकों व कर्मचारियों को भ पेंशन देने का निर्णय लिया था, जो
मान्यता प्राप्त थे ।

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