21 February 2021

(धार्मिक शिक्षा) का आधार बने मदरसे अब आधुनिक शिक्षा की मिसाल बनने जा रहे हैं।

(धार्मिक शिक्षा) का आधार बने मदरसे अब आधुनिक शिक्षा की मिसाल बनने जा रहे हैं।

दीनी तालीम (धार्मिक शिक्षा) का आधार बने मदरसे अब आधुनिक शिक्षा की मिसाल बनने जा रहे हैं। खास बात है कि यह प्रयास मुस्लिम धाíमक संगठनों ने अपने स्तर पर किया है। मुस्लिम समुदाय के सबसे बड़े संगठनों में शुमार जमीयत उलेमा-ए-हिंद आगामी शैक्षणिक सत्र से ही इसकी शुरुआत करने जा रहा है। इसके तहत 200 मदरसों के छात्रों को दीनी तालीम के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा से जोड़कर मुख्य धारा में लाने की पहल होगी। इनमें महाराष्ट्र के 100, दिल्ली के 10 तथा उत्तर प्रदेश के 90 मदरसे हैं। यहां पढ़ाई कर रहे करीब चार हजार छात्रों को इस वर्ष राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) का फार्म भरवाकर उन्हें कक्षा 10वीं की परीक्षा में बैठाया जाएगा।

अब तक दीनी तालीम में उर्दू व अरबी भाषा की शिक्षा ले रहे मदरसे के छात्र इतिहास, वित्त, सामाजिक विज्ञान, कंप्यूटर, अंग्रेजी समेत एनआइओएस के तमाम पाठ्यक्रम पढ़ेंगे। इन मदरसों को उन्नत तकनीकी से जोड़े जाने की तैयारी हो रही है। रोजाना आनलाइन कक्षाएं लगेंगी। दिल्ली व पुणो में बैठे शिक्षक आनलाइन कक्षाओं के माध्यम से इन छात्रों को पढ़ाएंगे।

शिक्षक हैं तैयार, जल्द होगी शुरुआत: छात्रों और आनलाइन कक्षाओं में समन्वय के लिए हर मदरसे से एक-एक शिक्षक को विशेष रूप से तैयार किया जाएगा। उत्तर प्रदेश व दिल्ली के ऐसे 100 शिक्षकों को पुणो में एक माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके पहले चरण में महाराष्ट्र के 100 मदरसों के 100 अध्यापक प्रशिक्षण हासिल कर चुके हैं। जमीयत के महासचिव व इस अभियान के निदेशक मौलाना महमूद मदनी के मुताबिक परियोजना के तहत पांच साल में 50 हजार बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। अभी तो 10वीं की ही परीक्षा एनआइओएस के माध्यम से देंगे आगे 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए भी तैयार किया जाएगा। हर वर्ष हजारों मुस्लिम नौजवान विभिन्न इस्लामी शिक्षा केंद्रों से शिक्षा प्राप्त करते हैं। जहां वह परंपरागत इस्लामी शिक्षा में विशेष योग्यता भी प्राप्त करते हैं, लेकिन वह वर्तमान में धर्मनिरपेक्ष की शिक्षा से अनभिज्ञ या मुख्यधारा में शामिल शिक्षा से अपरिचित होने के कारण अपने समाज में एक विशेष महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा पाते हैं। जमीयत के सचिव व इस परियोजना के मुख्य कर्ताधर्ता मौलाना नियाज अहमद फारूकी ने केंद्र व राज्य सरकार के मदरसों में आधुनिक शिक्षा को लेकर गंभीर प्रयासों के बीच जमीयत की पहल के सवाल पर कहा कि सरकार की आधुनिक शिक्षा को लेकर मदरसों में मतभेद है। सरकारी व्यवस्था में गुणवत्ता संबंधी खामिया भी हैं। तीसरे-आधुनिक शिक्षा के बाद भी मदरसे में पढ़ने वाले छात्र को मदरसा बोर्ड से डिग्री मिलती है। इसमें धार्मिकता का पुट है, जबकि एनआइओएस में हिंदू-मुस्लिम जैसा कोई मामला नहीं है और वैश्विक स्तर पर इसकी डिग्रियां मान्य हैं। जमीयत की इस परियोजना को एनआइओएस ने भी सराहा है और पूरे सहयोग का आश्वासन दिया है।

’>>जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने उठाया बीड़ा

’>>दीनी तालीम ले रहे छात्र 10वीं की परीक्षा के लिए किए जाएंगे तैयार

हमारा उद्देश्य है कि ‘जमीयत ओपन स्कूल’ के माध्यम से स्तरीय शिक्षा उपलब्ध की जाए ताकि विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा के मैदान में भी प्रगति कर सकें।

-मौलाना महमूद मदनी, महासचिव, जमीयत उलेमा-ए-हिंद

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