19 October 2020

उच्च शिक्षा निदेशालय के कार्यो में पारदर्शिता व निष्पक्षता लाने के लिए अधिकतर काम ऑनलाइन करने की प्रक्रिया चल रही है।

 उच्च शिक्षा निदेशालय के कार्यो में पारदर्शिता व निष्पक्षता लाने के लिए अधिकतर काम ऑनलाइन करने की प्रक्रिया चल रही है।


शिक्षकों व कर्मचारियों के निदेशालय आने पर रोक लगाकर ई-मेल के जरिए शिकायत-प्रार्थना पत्र भेजने का निर्देश है। अब उन अधिकारियों व कर्मचारियों की सूची तैयार हो रही है, जिनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। उनका ब्योरा शासन को भेजा जाएगा।


उच्च शिक्षा निदेशालय पर अनियमितता के आरोप लगते रहे हैं। पटलों में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर शासन ने कार्रवाई का निर्देश दिया है। भ्रष्ट कार्यप्रणाली पर अंकुश लगाने के लिए सिटीजन चार्टर कमेटी गठित की गई है। कमेटी को पेंशन, जीपीएफ सहित समस्त मामलों की फाइलें एक सप्ताह के अंदर निस्तारित करने का निर्देश दिया है। फाइल लंबित होने पर संबंधित अधिकारी व कर्मचारी को उसका कारण लिखित रूप से बताना होगा। साथ ही उन अधिकारियों व कर्मचारियों का ब्योरा एकत्र किया जा रहा है जो सालों से एक पटल पर जमे हैं और उनके खिलाफ शासन को शिकायत भेजी गई है। उनके कार्यो की गुप्त समीक्षा चल रही है। इसमें वो कहां कितने समय से काम कर रहे हैं? प्रतिदिन कितनी फाइलें निस्तारित करते हैं? कौन सी फाइल कितने दिनों तक रोकी गई? पटल का पर्वितन क्यों नहीं हुआ? आदि का ब्योरा एकत्र करके रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप हर काम पारदर्शी बनाने की दिशा में काम चल रहा है। आने वाले दिनों में कई बदलाव होंगे, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।

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