25 January 2020

उच्च न्यायालय ने शिक्षक भर्ती के विज्ञापन का ब्योरा किया तलब, भर्ती के पद घटाना गलत, विज्ञापित पदों पर ही करें नियुक्ति: हाईकोर्ट

उच्च न्यायालय ने शिक्षक भर्ती के विज्ञापन का ब्योरा किया तलब, भर्ती के पद घटाना गलत, विज्ञापित पदों पर ही करें नियुक्ति: हाईकोर्ट

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निदेशक माध्यमिक शिक्षा से इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती के लिए जारी विज्ञापन संख्या 1/2013 में रिक्त पदों का ब्योरा तलब किया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि अगली नियत तारीख पर निदेशक ब्योरा नहीं देते हैं तो उन्हें स्वयं अदालत में उपस्थित होना होगा।

दिवाकर सिंह की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने दिया है। याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और विभु राय का कहना था कि 2013 में हिंदी विषय के 909 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को कालेज आवंटन करना था। लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान शासन ने पदों की संख्या घटाकर 721 कर दी। इस निर्णय के खिलाफ दाखिल याचिका में एकल न्याय पीठ में पदों की संख्या घटाए जाने को गलत करार देते हुए विज्ञापित पदों के सापेक्ष ही नियुक्त करने का आदेश दिया है एकल पीठ के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी गई खंडपीठ ने अपील खारिज करते हुए एकल पीठ के निर्णय को सही ठहराया।

प्रदेश सरकार के अधिवक्ता का कहना था कि हाईकोर्ट ने चयनित 720 पदों में से रिक्त रह गए पदों पर ही नियुक्ति करने का निर्देश दिया है जिसकी प्रक्रिया की जा रही है, जबकि याची के अधिवक्ता का कहना था कि पदों को घटाया नहीं जा सकता है। 720 पदों के अलावा 909 पदों में से बचे हुए पदों पर भी नियुक्ति की जानी है। कोर्ट ने इस मामले में निदेशक विज्ञापन के तहत विभिन्न विषयों के अध्यापकों की नियुक्ति के लिए जारी पदों का ब्योरा अगली तारीख पर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है याचिका पर फरवरी में सुनवाई होगी।

अधिवक्ताओं को मुवक्किल के खिलाफ मुकदमा करने का अधिकार नहीं

विसं, प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण प्रयागराज में केंद्र सरकार के मुकदमों के इंचार्ज द्वारा केंद्र सरकार के अन्य अधिवक्ताओं को केसों के आवंटन में अनियमितता के आरोप को लेकर दाखिल याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि याचीगण केंद्र सरकार के अधिवक्ता हैं, उन्हें अपने मुवक्किल भारत सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर करने का अधिकार नहीं है। दूसरे अधिवक्ताओं के बीच केस आवंटन का विवेकाधिकार केंद्र सरकार या उसके अधिकृत स्थायी अधिवक्ता को है। अधिवक्ताओं को कोई निहित अधिकार नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल तथा न्यायमूर्ति वीसी दीक्षित की पीठ ने आचार्य राजेश त्रिपाठी व अन्य की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जिस आदेश को चुनौती दी गयी है, उससे याचीगण पीड़ित पक्ष नहीं है। इस आदेश से न्यायाधिकरण ने मुकदमों के दाखिले से पूर्व वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता को नोटिस देने का निर्देश दिया है। इससे याचियों के किसी अधिकार का उल्लंघन नहीं होता।

संगीत शिक्षक चयन पर यूपीपीएससी से जवाब-तलब

विधि संवाददाता, प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेजों में संगीत के शिक्षक की भर्ती के मामले में लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश (यूपीपीएससी) से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने उन अभ्यर्थियों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, जिन पर बिना अर्हता के चयनित होने का आरोप लगाया गया है। प्रीति यादव व अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर सुनवाई कर रहे हैं।

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