28 November 2019

बार-बार लोगो द्वारा यही प्रश्न किया जा रहा है क्या बीएड बाहर होगा? पढें एक अभ्यर्थी की पोस्ट

बार-बार लोगो द्वारा यही प्रश्न किया जा रहा है क्या बीएड बाहर होगा? पढें एक अभ्यर्थी की पोस्ट


नमस्कार मित्रों
बार बार लोगो द्वारा यही प्रश्न किया जा रहा है क्या बीएड बाहर होगा? देखिये इस बारे में मैं 10 महीने से कई पोस्ट प्रूफ के साथ डाल चुका हूं। लेकिन जैसे आपको पता है कि अपने लोगो के अंदर नकारत्मक विचार और डर बहुत जल्दी उत्प्न्न होता है।


जब मिश्रा जी बार बार बीएड को टारगेट कर रहे है, तो इरशाद जी ने भी कई बार उनको टोका है, कि सरकार ल पास अधिकार है संशोधन करने का कि वह कभी भी कर सकती है।

आप लोगो का कहना है कि जब बीएड केस डिटैग हो गया है तो मिश्रा जी बीएड पर ही क्यो बोल रहे है?

मिश्रा जी बीएड पर इसलिये बोल रहे है क्यो कि कोर्ट को वह यह बताना चाह रहे कि बीएड के कारण ही इस बार पासिंग मार्क्स 90,97 लगाया गया है। यह शिक्षामित्रों और बीटीसी की भर्ती है, जबकि दोनो न्यायाधीश जी ने इस बारे में उनको टोका है।

बीएड को एनसीटीई और राज्य सरकार ने शामिल किया है, विज्ञप्ति में भी साफ साफ लिखा है कि ब्रिज कोर्स कब करना है, केवीएस और अन्य राज्यो में बीएड अभ्यर्थी जॉब कर रहे।
माननीय न्यायालय में सब वकीलों को एक एक कर के मौका दिया जाता है, पंकज जी की बेंच में बीच मे किसी वकील को बोलने का अधिकार नही है। बार बार कुछ अपने साथियों द्वारा यह आरोप लगाना कि अपने सीनियर कहाँ है वह ऑब्जेक्शन क्यो नही कर रहे तो यह बात मुझे   हास्यस्पद से ज्यादा कुछ नही लगती। आप सिर्फ पास बनवा कर कोर्ट ही जाते हो या कोर्ट की समझ भी रखते हो। मतलब पास की फ़ोटो डालकर कुछ भी अंट संट लिखकर लोगो को गुमराह करो।

विपक्ष के हर एक बात का अपनी टीम जवाब देगी, जूनियर वकील वहां पॉइंट नोट कर रहे, सिर्फ बहस करने से ही केस नही जीत जाता।

1 लाख 72 हज़ार शिक्षामित्रों को कोर्ट ने अवैध क्यो किया, नौकरी करते हुए उनको पद से बाहर क्यो किया, सुप्रीम कोर्ट चाहती तो उनको पद में बने रहते हुए 2 मौके टेट पास करने के दे सकती थी, लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ।

जब सुप्रीम कोर्ट में इनकी सुनवाई चलती थी तो इनके नेता दिन भर में सैकड़ो ऑडियो, वीडियो जारी करते थे कि हम जीत चुके है। बड़े नामी वकील इनके साथ थे, लेकिन बीएड के वकील ने जिस तरह से इनकी कमर तोड़ी है यह लोग भूले नही है। उसी का बदला और गुस्सा यहां पास सिर्फ बीएड को टारगेट करते हुए निकाल रहे है।

जबकि नई शिक्षा नीति में भी डीएलएड का नाम बीएड कर दिया गया है, यह हम लोगो को 69000 से बाहर करने का सपना देख रहे जबकि अब हर जगह बीएड नाम ही जाना जाएगा।

एक बार फिर से यही कहना है कि कोर्ट भावनाओ पर नही बहती, सिंगल बेंच में क्या हुआ उसको भूल जाइए। आगे क्या होगा उस पर नज़र रखिये। इतिहास में कभी ऐसा नही हुआ कि 100 नम्बर वाला घर बैठे और 67 नम्बर वाला नौकरी।

कोर्ट है यहां सबकी बात सुनी जाती है, यहां समय भी वकील को कम मिल रहा इसलिये तारीख अत्यधिक लग रही। नकारात्मक ऑडियो और वीडियो से दूर रहिये।
स्वस्थ रहिये, खुश रहिये, मस्त रहिये।

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