12 August 2019

यहां जोड़ सीखने को कोमल इकाई तो मनीषा बनती है दहाई

यहां जोड़ सीखने को कोमल इकाई तो मनीषा बनती है दहाई

एक और एक का जोड़ ही दो होता है, और दो में से अगर एक को निकाल दिया जाए तो एक ही बचता है। यही नहीं शून्य के अगर स्थान को बदल दिया जाए तो संख्या का स्थानीय मान भी बदल जाता है। यह समझाने के लिए चोपन ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय मालोघाट में बच्चों को कोई थ्योरी नहीं पढ़ाई जाती है बल्कि दो-चार बच्चों को लेकर ही उन्हें कभी साथ तो कभी अलग करके उनको जोड़-घटाना समझाया जाता है। इसके साथ ही बच्चे को ही शून्य मानकर उनको इधर से उधर करके स्थानीय मान भी बताया जाता है।

जी हां, बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों के बच्चों में शिक्षा के प्रति रूचि बढ़ाने के लिए यह विद्यालय इन दिनों नजीर बनता जा रहा है। यहां तैनात दो महिला शिक्षक छात्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता लाने व रूचि बढ़ाने के लिए नए-नए क्रियाकलाप को अंजाम दे रही हैं। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में स्थित इस विद्यालय में बच्चों को ही इकाई, दहाई, सैकड़ा और हजार बनाकर उनके स्थान को परिवर्तित कर जोड़-घटाने के साथ ही स्थलीय मान व अंकित मान का मतलब समझाया जाता है। इससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रूचि बढ़ रही है और वे मन लगाकर पढ़ाई के इस क्रियाकलाप को अंजाम देते हुए उसमें पारंगत हो रहे हैं। विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक जेबा अफरोज व सहायक शिक्षक ज्योति गुप्ता तैनात हैं। कहती हैं कि सामान्य तरीके से बच्चों को शिक्षा देने के साथ ही ऐसे क्रियाकलाप से बच्चों को बेहतर तरीके से समझने में आसानी होती है। बताया कि बच्चों को जोड़ घटाना सिखाने के लिए कक्षा पांच की कोमल को इकाई, मनीषा को दहाई, रविशंकर को सैकड़ा व ओमप्रकाश को हजार बनाकर लाइन से खड़ा किया जाता है। इकाई, दहाई, सैकड़ा व हजार बने बच्चों का स्थान परिवर्तित करके स्थलीय मान व अंकित मान की विधिवत जानकारी दी जाती है। इसी खेल में माध्यम से बच्चों को जोड़ना व घटाना भी बताया जाता है। सही उत्तर देने वाले बच्चों को शिक्षकों द्वारा अपने स्तर से पुरस्कृत भी किया जाता है। हर दिन एक छात्र से आज का विचार ब्लैक बोर्ड पर लिखवाया जाता है। इसके बाद शिक्षक उक्त विचार को ट्रांसलेट कर अंग्रेजी में भी लिखते हैं ताकि अंग्रेजी में उनकी रूचि बढ़ाई जा सके। एक माह के विचारों को परखने के बाद बेहतर विचार लिखने वाले छात्र को सम्मानित किया जाता है। प्रभारी प्रधानाध्यापक द्वारा छात्रों को असमिया भाषा भी सिखाई जा रही है। प्रतिदिन दो-दो बच्चों को क्लास में खड़ाकर असमिया भाषा में बात करने का मौका दिया जाता है। शिक्षा के साथ ही खेलकूद में भी बच्चों का काफी रूचि है। यही वजह है कि वर्ष 2018 में हुए न्याय पंचायत स्तर पर कबड्डी प्रतियोगिता में इस विद्यालय के बच्चों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के एवज में प्रधानाध्यापक को बेस्ट टीचर अवार्ड से जिलाधिकारी द्वारा सम्मानित भी किया गया है। नवोदय क्रांति परिवार ने भी कुरुक्षेत्र में प्रभारी प्रधानाध्यापक को राष्ट्रीय अवार्ड से पुरस्कृत किया है।


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