09 August 2019

पुरस्कार के मानक पर खरे नहीं उतरे एक भी शिक्षक

पुरस्कार के मानक पर खरे नहीं उतरे एक भी शिक्षक

वाराणसी: राज्यस्तरीय पुरस्कार के लिए वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों से पहली बार आवेदन मांगा था। मंडल में सात अध्यापकों ने आवेदन भी किया लेकिन शासन के मानक पर एक भी शिक्षक खरे नहीं उतरे। ऐसे में मंडल के एक भी वित्तविहीन अध्यापक को पुरस्कार मिलने की संभावना अब खत्म हो गई है।
शासन ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती (25 दिसंबर) पर अब प्रत्येक मंडल के एक शिक्षक को ‘मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार’ से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत चयनित शिक्षक को 25 हजार रुपये नकद व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाना है। खास बात यह है कि राज्यस्तरीय पुरस्कार में पहली बार वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों को शामिल किया गया है। इसके तहत 31 जुलाई तक आवेदन मांगे गए थे।

संयुक्त शिक्षा निदेशक अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि वाराणसी से पांच, जौनपुर से दो अध्यापकों ने पुरस्कार के लिए आवेदन किया था। वहीं शासन के अनुसार निर्धारित पात्रता न होने के कारण मंडल स्तर पर ही इनका आवेदन खारिज हो गया है। इन शिक्षकों की नियुक्तियां शासन के मानक के अनुरूप नहीं हुई थी। ऐसे में मंडल के चार जिलों (वाराणसी, जौनपुर, चंदौली व गाजीपुर) से एक भी अध्यापक के नाम शासन को नहीं भेजे जा सके।

जनपद में 265 विद्यालय: जनपद में वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों की संख्या वर्तमान में 265 हैं। इसमें करीब तीन हजार शिक्षक तैनात है। वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए अब तक किसी तरह के प्रोत्साहन या पुरस्कार की व्यवस्था नहीं थी

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