09 August 2019

पांच वर्षो में नियुक्तियों की शासन ने तलब की फाइलें

पांच वर्षो में नियुक्तियों की शासन ने तलब की फाइलें

वाराणसी : संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध संस्कृत कालेजों में शिक्षकों की नियुक्तियां जांच के जद में आ गई है। शासन के निर्देश पर कुलसचिव ने पांच वर्षो में हुई नियुक्तियों की फाइलें डीआइओएस को सौंप दी। इसे लेकर सूबे के संस्कृत कालेजों के शिक्षकों में खलबली मची हुई है।
दरअसल, शासन ने विश्वविद्यालय से डीआइओएस के माध्यम से वर्ष 2014 से 2018 के बीच हुई नियुक्तियों की फाइलें तलब की है। आरोप है कि इस दौरान संस्कृत कालेजों में मनमाने तरीके से अध्यापकों की नियुक्तियां की गई। नियुक्तियों के विज्ञापन ऐसे समाचार पत्रों में जारी किए गए जिसकी प्रसार संख्या काफी कम थी। यहीं नहीं चयन समिति भी मनमाने तरीके से गठित की गई। खास बात यह है कि अनियमित तरीके से नियुक्तियों की शिकायत कोई और नहीं तत्कालीन कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी ने ही शासन से की थी।

उन्होंने नियुक्तियों की वीडियोग्राफी कराने सहित कई सुझाव भी दिए थे। इसमें आयोग के माध्यम से नियुक्ति कराने का भी सुझाव शामिल है। समझा जा रहा है कि तत्कालीन कुलसचिव के सुझाव पर ही शासन ने अब संस्कृत कालेजों में अध्यापकों की नियुक्तियां आयोग के माध्यम से करने का निर्णय लिया है। दूसरी पांच वर्षो की नियुक्तियों पर जांच बैठा दी गई है। कुलसचिव राज बहादुर ने बताया कि तीसरे राउंड में करीब 50 अध्यापकों की नियुक्तियों की फाइलें डीआइओएस को सौंप दी गई है। पांच वर्षो में 165 संस्कृत कालेजों की लगभग 650 शिक्षकों की नियुक्तियां हुईं थी।

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