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बुधवार, 16 मई 2018

दो दशक बाद पॉलीटेक्निक में एआईसीटीई हुई लागू, 18 साल बाद मिली अनुमति

दो दशक बाद पॉलीटेक्निक में एआईसीटीई हुई लागू, 18 साल बाद मिली अनुमति

पॉलीटेक्निक में पठन-पाठन की व्यवस्था सुदृढ़ होने जा रही है। छात्रों को पढ़ाने के लिये अब डिप्लोमाधारी शिक्षक नहीं चलेंगे, न ही डिप्लोमाधारी प्रधानाचार्य होंगे। इसके लिये प्राविधिक शिक्षकों की भर्ती होगी। प्राविधिक शिक्षा विभाग में एआईसीटीई को लागू करने की प्रदेश सरकार की मंजूरी से यह संभव हो पाया है।

प्राविधिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी है। मात्र 25 फीसदी शिक्षकों पर इसका भार बना हुआ है। वहीं, शिक्षकों की कमी के चलते छात्रों को पढ़ाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। कुछ संस्थान तो ऐसे हैं, जहां कई सालों से कोर्स चल रहे हैं, लेकिन पढ़ाने के शिक्षक ही मौजूद नहीं है।

लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। एआईसीटीई की नियमावली पॉलीटेक्निक में लागू होने जा रही है। इसके बाद छात्रों को पढ़ाने के प्राविधिक शिक्षकों की तैनाती होगी। वहीं, विभागाध्यक्ष और प्रधानाचार्य भी एमटेक और पीएचडी धारक बनेंगे।

18 साल बाद मिली अनुमति

प्राविधिक शिक्षा विभाग और अन्य विभागों में अभी तक समानता नहीं थी। एआईसीटीई लगने के बाद से अब मान्यताओं में भी समानता हो गई है। करीब 2001 से एआईसीटीई को लागू करने की मांग चल रही थी। 2007 में यह मांग तेज हो गई। लेकिन, एआईसीटीई को लागू नहीं कराया जा सका। 11 साल के अथक प्रयासों के बाद इसको पॉलीटेक्निक में लागू करने की अनुमति मिली।

शासन ने दी मंजूरी

मंगलवार को शासन ने एआईसीटीई को पॉलीटेक्निक में लागू करने पर अपनी मुहर लगा दी है। इसकी मंजूरी के बाद विभाग में अर्ह पात्रों में काफी उत्साह बढ़ गया है। अर्ह शिक्षकों को इसका सीधा लाभ अब मिलना शुरू हो जायेगा।

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